Essay

Global warming essay in hindi | ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध - अर्थ और समाधान

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प्रस्तावना

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि प्रत्येक प्राणी को जीवित रहने के लिए प्रकृति में संतुलन और संतुलित तापमान की आवश्यकता होती है परंतु आज के इस बदलते दौर में अनेक प्रकार के औद्योगिक व मानवीय क्रियाकलापों के कारण प्रकृति से जुड़ी अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही है जैसे वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, सूखा, बाढ़, ग्लेशियरों का पिघलना, ग्लोबल वॉर्मिंग, ज्वालामुखी विस्फोट आदि जिनमें से आज के समय में सबसे बड़ी और खतरनाक समस्या ग्लोबल वॉर्मिंग है|

यह एक ऐसी समस्या है जिसके बारे में लगभग हर किसी विद्यार्थी ने सुना है परंतु इस समस्या का अर्थ लगभग अधिकतर विद्यार्थियों को अस्पष्ट रहता है इसलिए ग्लोबल वॉर्मिंग के अर्थ के बारे में हम इस प्रकार से समझ सकते हैं "पृथ्वी के तापमान में हो रही क्रमिक वृद्धि को ही ग्लोबल वॉर्मिंग के नाम से परिभाषित किया जा सकता है"|

अर्थात हमारी पृथ्वी के तापमान में प्रत्येक वर्ष वृद्धि हो रही है जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही है जैसे हमारे ग्लेशियर पिघल रहे हैं, नदियां सूख रही हैं और जंगलों में तापमान वृद्धि के कारण आग लगने व प्रमुख प्रजातियों के विलुप्त होने जैसी अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं इसलिए यह समस्या हमारी पृथ्वी और इसके प्राणियों के लिए गंभीर समस्या के रूप में सामने आ रहे हैं|

ग्लोबल वॉर्मिंग के मुख्य कारण

अत्यधिक तेजी से हो रही वनों की कटाई

ग्लोबल वॉर्मिंग जैसी गंभीर समस्या के लिए तेजी से हो रही वनों की कटाई भी बहुत बड़ी मात्रा में जिम्मेदार है क्योंकि हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी पर केवल पेड़ ही एक ऐसा स्त्रोत है जो हमारे पर्यावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं तथा बदले में ऑक्सीजन को रिलीज करते हैं इसलिए यदि हम कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने वाले एकमात्र स्त्रोत की संख्या को कम करेंगे तो स्वत: ही हमारे पर्यावरण में CO2 की मात्रा बढ़ेगी और ग्लोबल वॉर्मिंग में भी प्रत्यक्ष रूप से वृद्धि होगी|

ओजोन परत हास्

ओजोन गैस दो प्रकार की होती हैं एक ओजोन तो हमारे समताप मंडल में रक्षा कवच के रूप में उपस्थित होती है जो सूर्य की पराबैंगनी किरणों से हमारी रक्षा करती है इसके अतिरिक्त एक ओजोन मानवीय क्रियाकलापों के कारण उत्पन्न होती है जो हमारे लिए हानिकारक होती है तथा हमारी ओजोन परत को भी नुकसान पहुंचाती है ओजोन परत के हास् के कारण ही ग्लोबल वॉर्मिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है|

अनेक प्रकार की असहज मानवीय गतिविधियां

पर्यावरण की इस गंभीर समस्या ग्लोबल वॉर्मिंग में माननीय क्रियाकलाप सबसे अधिक जिम्मेदार है क्योंकि फ्रिज, जनरेटर, वाहन अनेक प्रकार की मशीनों का अधिक मात्रा में उपयोग के कारण CO2 गैस तेजी से बढ़ रही है जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से ग्लोबल वॉर्मिंग का एक कारण है|

औद्योगीकरण और शहरीकरण में तेजी से वृद्धि

जैसे कि हम देख रहे हैं कि चारों तरफ अनेक प्रकार के बड़े-बड़े परिवर्तन हो रहे है तथा पेड़-पौधों के स्थान पर बड़े-बड़े उद्योग, शहर आदि स्थापित किए जा रहे हैं जो ग्लोबल वॉर्मिंग का एक कारण है क्योंकि पहले तो हम पेड़ों के स्थान पर बड़ी-बड़ी बिल्डिंग, उद्योग स्थापित कर रहे है तथा उद्योगों के द्वारा बड़ी-बड़ी मशीनों व अन्य  प्रकार की चीजों से कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, हाइड्रोक्लोराइड, अमोनिया क्लोराइड, हाइड्रोजन सल्फाइड जैसे जैसे निकल रही है जिसका परिणाम यह हो रहा है कि हमारी पृथ्वी पर असंतुलन उत्पन्न हो रहा है|

ज्वालामुखी विस्फोट भी है जिम्मेदार

ग्लोबल वार्मिंग के अनेक कारणों में से ज्वालामुखी विस्फोट भी बहुत बड़े स्तर पर जिम्मेदार है क्योंकि अध्ययन में यह साबित किया गया है कि ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड गैस के साथ-साथ हाइड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया क्लोराइड, हाइड्रोजन अम्ल जैसी गैसे निकलती है जिससे हमारी पृथ्वी के तापमान में तेजी से वृद्धि होती है तथा इसका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष परिणाम यह होता है कि हमारी प्रकृति में असंतुलन उत्पन्न होता है तथा तापमान में तेजी से वृद्धि होती है|

हरित गृह प्रभाव यानी ग्रीन हाउस इफेक्ट

हरित गृह प्रभाव भी ग्लोबल वार्मिंग के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है क्योंकि कुछ ऐसे क्षेत्र और देश के हिस्सों में खेती इस प्रकार से की जाती है कि वहां का तापमान खेती के लिए संतुलित नहीं रहता, परंतु वहां पर खेती करने के लिए शीशों की दीवारों का घर बनाया जाता है जिसमें खेती की जाती है इस परिस्थिति में खेती तो हो जाती है परंतु सूर्य का प्रकाश जो कांच की दीवारों के द्वारा अंदर पहुंचता है वह बाहर नहीं जाता जिसका परिणाम यह होता है कि वहां के तापमान में वृद्धि होती है तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से यह ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए जिम्मेदार होता है|

विद्युत उत्पादन भी है जिम्मेदार

हम सभी विद्युत उत्पादन की प्रक्रिया को भली-भांति जानते हैं इसलिए आप सभी जानते हैं कि विद्युत उत्पादन के लिए हम अधिक मात्रा में कोयले का प्रयोग करते हैं और कोयले का इतनी अधिक मात्रा में दहन CO2 गैस के उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है जिससे तापमान में तेजी से वृद्धि के साथ-साथ ग्लोबल वॉर्मिंग भी बढ़ती है|

ग्लोबल वॉर्मिंग के कुछ हानिकारक प्रभाव

जंगलों में आग लगना - पिछले कुछ वर्षों में जंगलों में आग लगने की समस्या बहुत अधिक सामने आ रही है और यह सब ग्लोबल वॉर्मिंग का प्रभाव है क्योंकि अनेक कारणों से पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हो रही है जिस कारण जंगलों में आग लग रही है जिससे हमारे वन्य प्राणी तथा कुछ महत्वपूर्ण प्रजाति विलुप्त हो रही है जो बहुत बड़ा खतरा है|

ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं - हम जानते हैं कि हमारी नदियों में पानी ग्लेशियरों से आता है और यह हमारी प्रकृति में संतुलन के लिए बहुत आवश्यक है परंतु पृथ्वी के तापमान में निरंतर वृद्धि के कारण हमारे सभी ग्लेशियर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और वह असामान्य रूप से पिघल रहे हैं परिणाम स्वरूप बाढ़ व अन्य प्रकार की प्राकृतिक समस्याएं उत्पन्न हो रही है|

ओजोन परत के लिए दुष्प्रभावी - हम जानते हैं कि ओजोन परत दो प्रकार की होती हैं एक जो हमारे समताप मंडल में उपस्थित होती है तथा दूसरी जो मानवीय क्रियाकलापों के कारण उत्पन्न होती है|

समतापमंडल में उपस्थित ओजोन गैस हमारे लिए रक्षा कवच का काम करती है परंतु जो मानवीय क्रियाकलापों के कारण उत्पन्न होती है वह हमारी रक्षा कवच वाली ओजोन को भी नुकसान पहुंचाती है तथा प्रकृति के तापमान में भी वृद्धि करती है जो एक बहुत बड़े खतरे का संकेत है|

प्रकृति में असंतुलन भी ग्लोबल वार्मिंग के कारण ही हो रहा है - जैसा कि हम सभी जानते हैं कि एक सुरक्षित वातावरण और पर्यावरण के लिए प्रकृति में संतुलन होना अति आवश्यक है परंतु ग्लोबल वार्मिंग के कारण वन्य प्रजाति जलीय जीवन और ग्लेशियर बाढ़ या अन्य प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं भी उत्पन्न हो रही है जो प्रकृति में असंतुलन का संकेत है|

इसके अतिरिक्त ग्लोबल वॉर्मिंग के अनेक अनगिनत दुष्प्रभाव है जैसे हमारी प्रकृति में अनेक प्रकार की अनावश्यक गैसों का बढ़ना, जिस कारण हमारा वन्य जीवन, प्राकृतिक संतुलन व मानवीय क्रियाकलाप प्रभावित होते हैं तथा मनुष्य में भी अनेक प्रकार की बीमारियां उत्पन्न होती है कई स्टडी में यह साबित किया गया है कि ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण त्वचा कैंसर व अनेक प्रकार की घातक बीमारियां भी संभव है|

ग्लोबल वार्मिंग पर नियंत्रण के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय

ग्लोबल वॉर्मिंग को नियंत्रण करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है लोगों में जागरूकता लाना क्योंकि यदि लोग इस समस्या और इसके प्रभाव से परिचित रहेंगे तो वे खुद ही इस विषय पर चिंता कर कई प्रकार के क्रियाकलापों को करने से बचेंगे जिससे हमारी प्रकृति पर कोई दुष्प्रभाव ना पड़े|

सरकार द्वारा उद्योगों या अन्य कार्यों पर रोक लगाना या उनके लिए कुछ महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी करना - यह कार्य भी ग्लोबल वॉर्मिंग जैसी समस्या पर नियंत्रण के लिए अति आवश्यक है क्योंकि उद्योगों के कारण ही हमारे पर्यावरण में अनेक प्रकार के हानिकारक गैस उत्पन्न हो रही है बहुत अधिक मात्रा में उद्योगों से हानिकारक गैसें, जहरीले अपशिष्ट, तरल और मृदा व जल प्रदूषण के लिए जिम्मेदार अनेक प्रकार का अपशिष्ट निकलता है जिनके लिए सरकार को अनेक प्रकार के नियम बनाकर रोक लगानी चाहिए तथा कुछ संभव परिवर्तन करने चाहिए|

अनवीकरणीय संसाधनों का सीमित मात्रा में उपयोग करें जैसा कि आप सभी जानते हैं कि पेट्रोल-डीजल, कोयला नवीकरणीय संसाधनों का एक उदाहरण है यदि हम इस प्रकार के संसाधनों का सीमित मात्रा में उपयोग करेंगे तो इससे CO2 व अन्य हानिकारक गैसों की मात्रा में कमी होगी जिससे ग्लोबल वॉर्मिंग से निजात मिलेगी|

वाहनों उद्योगों व जनरेटर में इस्तेमाल किए जाने वाले पेट्रोल, डीजल जैसे ईंधन की खपत को कम करना चाहिए तथा इसमें संभावित परिवर्तन करने चाहिए और सामाजिक स्तर पर हमें ध्यान रखना चाहिए कि जहां तक संभव हो सके मोटर वाहन के स्थान पर पैदल या साइकिल का इस्तेमाल करें यदि विश्व भर की जनसंख्या इस प्रकार की चीजों को प्राथमिकता देगी तो बहुत बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा जिसका सकारात्मक प्रभाव हमारी प्रकृति पर पड़ेगा|

अधिक से अधिक वृक्ष लगाकर - हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी पर एकमात्र वृक्ष ऐसा स्त्रोत है जो हमारे पर्यावरण से हानिकारक गैसों को अवशोषित करते हैं तथा हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं तथा वृक्ष अनेक प्रकार से हमारे लिए उपयोगी है इसलिए हमें इनके महत्व को समझ कर इन्हें संभावित स्थानों पर रोहित करना चाहिए तथा लोगों को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए|

वृक्षों की कटाई को कम कर - वृक्ष हमारे लिए जीवन का दूसरा नाम है इसलिए हमें जहां तक संभव हो इनकी कटाई को कम करना चाहिए तथा संभव होने पर ही हमें इन्हें काटना चाहिए क्योंकि जिस तेजी से वृक्ष काटे जा रहे हैं उसी गति से वृक्ष नहीं उगाए जा सकते इसलिए हमें इस बात को ध्यान में रखकर कार्य करना चाहिए जिससे हमारी प्रकृति को नुकसान ना हो|

शहरीकरण और औद्योगीकरण पर नियंत्रण - शहरीकरण व औद्योगिकरण पर नियंत्रण भी अति आवश्यक है हमें पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली तकनीकी में परिवर्तन करना चाहिए तथा संभव होने पर इनकी मात्रा सीमित करनी चाहिए जिससे हमारी प्रकृति संतुलित रहेगी और हमारी वर्तमान पीढ़ी और भावी पीढ़ी के लिए सुरक्षा बनी रहेगी|

इसके अतिरिक्त हमें शहरीकरण पर भी नियंत्रण करना चाहिए क्योंकि जिन स्थानों पर हरे भरे वृक्ष लहराते हैं उस स्थान पर लोगों ने पक्की मिट्टी की इमारतें खड़ी कर दी हैं जो तापमान के अलावा कुछ भी नहीं देती इसलिए हमें इन चीजों का ध्यान रखकर इनमें संशोधन करने की आवश्यकता है|

निष्कर्ष

हम सभी जानते हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग इतनी बड़ी और गंभीर समस्या है कि यह केवल सरकार और लोगों के प्रयत्न से ही संभव नहीं है, इस समस्या से लड़ने के लिए पूरे विश्व को एकजुट होक



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