रक्षाबंधन

रक्षाबंधन का इतिहास, क्यों मनाया जाता है राखी का त्यौहार

रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है ? रक्षाबंधन का इतिहास

सभी भाई-बहनों को रक्षा बंधन की हार्दिक शुभ कामनायें। रक्षाबंधन का यह त्यौहार भारत में बड़े ही हर्सोल्लास के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म के सभी लोग इस त्यौहार को मानते है। बाकी सब त्यौहारों की तरह रक्षाबंधन के त्यौहार का भी अपना इतिहास है। इसके पीछे कई कहानियां है जो कि दंतकथाओं में काफी लोकप्रिय है। चलिए रक्षाबंधन की कुछ विशेष कहानियों के बारे में जानते है, जो इस त्यौहार को मानाने को लेकर जुडी हुयी हैं।

जैसे ही रक्षाबंधन का त्यौहार निकट आता है। सभी बहनो और भाइयों के चेहरों पे मुस्कान आ जाती है। और हो भी क्यूँ न। भाई बहन का तो रिस्ता इतना अनमोल होता है, कि उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। रक्षा बंधन भारत में मनाया जाने वाला एक प्रसिद्ध हिंदू त्यौहार है। रक्षा बंधन का मतलब रक्षा का धागा माना जाता है। रक्षा बंधन भाई और बहन के बीच प्यार जगाने के लिए मनाया जाता है।

रक्षा बंधन का त्यौहार सदियों से चला आ रहा है। यह श्रवण महीने के पूर्णिमा दिवस पर मनाया जाता है। रक्षाबंधन त्यौहार भाई बहनों के बीच प्यार और शांति को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है। रक्षा बंधन के इस विशेष त्यौहार की शुरूआत के पीछे कई कहानियां है। आईये जानते है।

माता लक्ष्मी और राजा बलि की कहानी

बैसे तो रक्षाबंधन के त्यौहार के बारे में कई कहानियां है। माता लक्ष्मी और राजा बलि की कथा कुछ इस प्रकार है - दानवेन्द्र राजा बलि ने जब यज्ञ पूर्ण कर स्वर्ग का राज्य छीनने का प्रयास किया। तो इन्द्र आदि देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की थी। तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर ब्राह्मण का वेष धारण कर राजा बलि से भिक्षा माँगने पहुँचे।

भिक्षा में उन्होंने राजा बलि से तीन पग जमीन मांगी, गुरु के मना करने पर भी बलि ने तीन पग भूमि दान कर दी। भगवान ने तीन पग में सारा आकाश पाताल और धरती नापकर राजा बलि को रसातल में भेज दिया। इस प्रकार भगवान विष्णु द्वारा बलि राजा के अभिमान को चकनाचूर कर देने के कारण यह त्योहार बलेव नाम से भी प्रसिद्ध है। जब बाली रसातल में चला गया,

तब बलि ने अपनी भक्ति के बल से भगवान को रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया। भगवान के घर न लौटने से परेशान लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाय बताया। उस उपाय का पालन करते हुए लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उसे राखी बांधकर अपना भाई बनाया। और अपने पति भगवान विष्णु और भाई बलि को अपने साथ ले आयीं। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी। इसलिए रक्षाबंधन का त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।

यमराज और यमुना की कहानी

एक बार मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना के पास 12 वर्षों तक नहीं गए। इस पर उनकी बहन यमुना को काफी दुःख हुआ था। 12 बर्ष पश्चात गंगा माता के परामर्श पर यमराज बहन यमुना के पास जाने का निश्चय किया। अपने भाई का आगमन सुनकर बहन यमुना को काफी ख़ुशी हुयी। और अपने भाई का बहुत प्रकार से स्वागत किया।

तभी बहन यमुना ने अपने भाई यमराज के हाथों में राखी बाँधी थी। इससे खुश होकर यमराज ने बहन यमुना से बरदान मांगने के लिए कहा, तो उन्होंने अपने भाई से बार बार मिलने की इच्छा प्रकट की। साथ ही यमराज ने उन्हें अमरता का भी बरदान दिया था जिससे बे अमर हो गयी।

महाभारत काल में राखी

इतिहास मे कृष्ण और द्रौपदी की कहानी प्रसिद्ध है, जिसमे युद्ध के दौरान श्री कृष्ण की उंगली घायल हो गई थी, श्री कृष्ण की घायल उंगली को द्रौपदी ने अपनी साड़ी मे से एक टुकड़ा बाँध दिया था, और इस उपकार के बदले श्री कृष्ण ने द्रौपदी को किसी भी संकट मे द्रौपदी की सहायता करने का वचन दिया था। स्कन्ध पुराण, पद्मपुराण और श्रीमद्भागवत में वामनावतार नामक कथा में रक्षाबन्धन का प्रसंग मिलता है। कहा जाता है, की तभी से रक्षाबंधन के त्यौहार की शुरुआत हुयी थी।

रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ - रक्षा बंधन की कहानी

जब मध्यकालीन युग में राजपूत और मुस्लिमों के बीच संघर्ष चल रहा था। रानी कर्णावती चित्तोड़ के राजा की पत्नी थी, जो विधवा थी। ऐसे में रानी कर्णावती अकेली अपने राज्य चित्तोड़ की ठीक से नहीं कर पा रही थी।

उस समय सुल्तान बहादुर शाह गुजरात का राजा था। जो चित्तोड़ पर निगाह गड़ाए बैठा था। सुल्तान बहादुर शाह से खुद को अपनी प्रजा को बचाने के लिए कर्णावती ने सम्राट हुमायूँ से मदद मांगी और उन्हें एक राखी भेजी। उस राखी को पाकर हुमायूँ ने रानी कर्णावती को बहन का दर्जा दिया और उसके राज्य को सुल्तान बहादुर शाह से सुरक्षा दी।

तब से या इससे भी पहले की कई और कहानियां है जिनसे राखी, रक्षा बंधन के त्यौहार की शुरूआत हुई। इसके अलावा और भी कई कहानियां है जिनसे रक्षा बंधन की शुरूआत हुई।

राखी क्या है ?

परंपराओं के अनुसार, बहन दिया, रोली, चावल और राखी के साथ पूजा थाली तैयार करती है। वे देवी की पूजा करती है उसकी पूजा अपने भाई की कलाई पर राखी से संबंध रखती है। राखी एक पवित्र धागा है। भारतीय परंपरा में राखी के धागे को लोहे से मजबूत माना जाता है, क्योंकि यह आपस में प्यार और विश्वास की परिधि में भाइयों और बहनों को दृढ़ता से बांधता है।

रक्षा बंधन कैसे मनाया जाता है ?

रक्षा बंधन के दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक और हाथ की कलाई पर राखी बांधती है, अपना प्यार व्यक्त करती है। वह अपने भाई की रक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना भी करती है।बदले में भाई अपनी बहन को मिठाई या एक अच्छा उपहार देता है और उसे शुभकामनायें भी देता है। साथ ही बहन कि हमेशा मदद और रक्षा करने का वादा करता हैं।

रक्षा बंधन हिंदू धर्म के मुख्य त्योहारों में से एक है, यह उत्सव देश के अलग-अलग हिस्सों में उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह भाई बहन के बंधन को मजबूत करने के लिए जाना जाता है। इसे सभी उम्र के भाई बहन मनाते है। Happy Raksha Bandhan to all.

इसे उत्तरी भारत में कजरी पूर्णिमा या कजरी नवमी भी कहा जाता है। रक्षा बंधन एक विशेष मुहूर्त या शुभ समय पर मनाया जाता है अन्यथा इसे अशुभ माना जाता है। भारत में इसे सभी धर्म के लोग धूमधाम से मनाते है।

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