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चाणक्य पंडित की नीति हिंदी - Chanakya Niti In Hindi

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आज के इस आर्टिकल में हम बुद्धि के भगवान कहे जाने वाले चाणक्य पंडित के बताए गए अमूल्य नीतियों के बारे में बात करेंगे। लेकिन उससे पहले हम थोड़ा सा चाणक्य पंडित जी के जीवन के बारे मे जानते है। इनके पिता का नाम ऋषि चणक था। इनको कौटिल्य ओर विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है आचार्य चाणक्य एक ऐसी महान विभूति थे, जिन्होंने अपनी विद्वत्ता और क्षमताओं के बल पर भारतीय इतिहास की धारा को बदल दिया। चलिये थोड़ा शुरु से शुरू करते।

एक बार यह जब छोटे थे। तो इनके घर एक बाबा (Astrologer) आये उन्होंने इनकी माँ से कहा कि चाणक्य की इनके जीवन मे राज्य योग लिखा है या यह आगे चलकर देश का प्रधानमंत्री भी बन सकता है।  इतना सुन कर उनकी माँ रोने लगी वो यह सोचने लगी कि यह प्रधनमंत्री बन गया तो मुझे भूल जाएगा तब बाबा ने कहा कि इसकी पुष्टि करनी है। तोह चाणक्य के दाँत को देखो सामने वाले दाँत पर उनके एक नागराज का चिन्ह होगा वो पुष्टि करने के लिए माता ने जब चाणक्य का दांत देखा तो उस पर वो नागराज का चिन्ह देख कर माता रोने लगी बोली कि तू आगे चलकर प्रधनमंत्री बनेगा मुझे भूल जाएगा। इतना सुनते ही चाणक्य ने पत्थर उठाया और अपने वो दांत तोड़ दिया। ओर बोले माँ तेरे इस प्रेम के चलते मैं ऐसे हज़ारो राज पाठ त्याग दूंगा। इससे यह पता चलता है कि चाणक्य को राज पाठ मैं कोई रुचि नही थी। आगे चलकर चाणक्य तक्षिला के प्रधनाचार्य बने।

चाणक्य जी की 10 नीतियां -

  1. मेहनत बहुत लगती है साम्राज्य बनने मैं पर जब बनता है तो उस पर राज भी आप करते हो।
  2. प्यार और करियर में से किसी को चुनना हो तो करियर को चुनना क्योकि भूखे पेट कभी प्यार नही होता।
  3. कपड़े और चेहरे झूठ बोल करते है इंसान की असलियत तो वक़्त बताता है।
  4. तुम्हारे लक्ष्य के अलावा जिस पर भी तुम्हारा ध्यान है वही तुम्हारा परम शत्रु है।
  5. आर्थिक स्थिति चाहे कितनी भी खराब हो जीवन का सही आनंद लेने के लिए मानसिक स्थिति का अच्छा होना बहुत जरूरी है।
  6. एक बुद्धिमान व्यक्ति कभी बुद्धिमान होने का दावा नहीं करता और एक मूर्ख कभी मानता नही की वो मूर्ख है।
  7. जो व्यक्ति सीधी साफ बात करता है उसकी वाणी जरूर कठोर हो सकती है लेकिन वो किसी को धोखा नहीं देता।
  8. बुराई और अच्छाई दोनों हमारे अंदर ही होती है हम जिसका प्रयोग अधिक करते है वही निखर के आती है और उसी से हमारा व्यक्ति बनता है।
  9. ज़िन्दगी मैं बुरा वक्त इसलिए आता है कि अपने मैं छुपे गैर ओर गैर मैं छिपे अपने नज़र आ सके।
  10. दोस्त, किताब, रास्ता और सोच सही हो तो जीवन को बेहतर बना देती है ।

चाणक्य पंडित के बारे में कुछ और भी जाने -

जब सिकन्दर भारत की तरफ बढ़ रहा था। उन दिनों चाणक्य के मन मे एक चीज़ थी कि क्यों न अखण्ड भारत का निर्माण किया जाए एक शक्तिशाली राजा को खड़ा कर जाए। यह अलग - अलग राजाओ के पास गए वो मगद के सबसे बड़े राजा धनानंद जी के पास गए। उनसे कहा कि क्यों न सिकंदर के खिलाफ तैयारी करी। उस समय राजा धनानंद प्रजा से कर वसूलता था और उसे जुए सट्टे मैं लगता ओर प्रजा के पैसे से को अपने भोगविलास मैं ख़र्च कर देता था। उन्होंने इससे समझाया कि प्रजा का पैसा प्रजा हित के लिए इस्तेमाल करो। धनानंद क्रोध मैं बोला - ए पंडित तुम पण्डिताई करो मुझे राज - पाठ मत सिखाओ फिर जब चाणक्य ने ओर समझाया तो राजा धनानंद ने चाणक्य पंडित को धखा मार कर गिरा दिया ओर उनकी सीखा खुल गयी तो बोला तेरी यही सीखा काट देंगे चाणक्य को बहुत बुरा लगा। उन्होंने तभी संकल्प लिया कि मैं यह सीखा तब तक नही बाँधूँगा जब तक

तेरा साम्राज्य न खत्म करदु चाणक्य पंडित ने अपना पूरा जीवन चंद्रगुप्त मौर्य को हर प्रकार की कला सीखने मैं लगाया यह चंद्रगुप्त मौर्य को 14 वर्ष की आयु से ही हर प्रकार की कला सिखा रहे थे। और आगे चल कर चाणक्य पंडित ने नंद वंश को हटाकर चंद्रगुप्त मौर्य को राजगद्दी पर बैठाया। उनकी नीतियां आज भी जीवन की हर कठिन परिस्थिति में काम आती है आशा करते है आपको हमारे यह चाणक्य पंडित जी की नीतियों वाला आर्टिकल पसंद आया होगा।



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