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अकबर बीरबल की कहानी हिंदी में - AKABAR BIRBAL STORY IN HINDI

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मुगल शासक जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर और उसके मुख्य सलाहकार बीरबल को कौन नहीं जानता है? मोहम्मद अकबर भारत के सम्राट थे, जो 1542 से 1606 तक भारत की गद्दी पर बैठे थे। बीरबल उनके नवरत्नों में से एक थे। बीरबल बादशाह अकबर के मुख्य सलाहकार होने के साथ-साथ अकबर के सबसे अच्छे मित्र भी थे।

अकबर बीरबल के जीवन की घटनाएँ, उनकी मज़ेदार बातचीत और उनके बीच की खट्टी-मीठी तकरार हम लोग वर्षों से कहानियों के रूप में सुनते आ रहे है और इन कहानियों को पीढ़ी दर पीढ़ी विकसित किया गया है। इन कहानियों पर कई किताबें लिखी गई हैं, जो हर उम्र के लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। इन कहानियों की खास बात यह है कि ये हमारा मनोरंजन करने के साथ-साथ ज्ञान की बातें भी सिखाती हैं। शायद यही वजह है कि इतने सालों बाद भी ये कहानियां आज भी कायम हैं।

 बैसे तो अकबर और बीरबल के ऊपर बहुत सी कहानिया हैं। जिनके ऊपर किताबे भी लिखी जा चुकी है। हम यहाँ आपको अकबर बीरबल की सबसे मशहूर कहानी "बीरबल की खिचड़ी" के बारे में बताने जा रहे हैं।

कहानी: बीरबल की खिचड़ी - BIRBAL KI KHICHDI

दोस्तों 'बीरबल की खिचड़ी की कहानी हिंदी' में बीरबल को अजीबोगरीब तरीके से खिचड़ी बनाते देख बादशाह अकबर चिढ़ जाते हैं। लेकिन जब उन्हें इसके पीछे के कारण के बारे में पता चलता है, तो उन्हें बीरबल की बुद्धिमत्ता के साथ-साथ उसके अच्छे स्वभाव की भी प्रशंसा होने लगती है। कहानी कुछ इस प्रकार है। 

भोजन के बाद बादशाह अकबर बीरबल के साथ यमुना के किनारे सैर कर रहे थे। सुरक्षा के लिए उनके साथ कुछ सैनिक भी थे। जनवरी का महीना था। और दिल्ली में शीतलहर चल रही थी। कड़ाके की ठंड में यमुना नदी का पानी बर्फ की तरह ठंडा हो गया था।
 
अकबर ने यमुना के पानी में अपनी उंगली डाल दी ? शीतलता का अनुभव करते हुए उन्होंने तुरंत अपनी उंगली पानी से बाहर निकाली और कहा, "बीरबल! इस मौसम में यमुना का पानी बर्फ की तरह हो जाता है। इसमें उंगली डालना भी मुश्किल है। अगर किसी को इस पानी में एक पल के लिए भी खड़ा कर दिया जाए, तो वह ठण्ड से मर जाएगा। 

बीरबल की सोच अकबर के विपरीत थी। उन्होंने कहा, "मैं आपसे सहमत नहीं हूं, राजन। अगर अंदर जूनून हो तो आदमी कुछ भी कर सकता है। यमुना के पानी में कुछ देर खड़े रहना बहुत छोटी बात है। 

अकबर बोले - बीरबल हम इस बात को नहीं मान सकते कि इन दिनों यमुना के पानी में कोई खड़ा हो सके। अकबर बीरबल की बात मानने को कतई तैयार नहीं थे। 

बीरबल ने कहा तो आज़माकर देख लीजिये जहाँपनाह। कोई न कोई ज़रूर होगा, जो अपनी इच्छाशक्ति के दम पर ये कर जायेगा। बीरबल विश्वास के साथ बोला। 

अकबर बोले - तो ठीक है। कल पूरे राज्य में मुनादी करवा दी जाये, कि जो कोई भी पूरी रात यमुना के पानी में कमर तक डूबकर खड़ा रहेगा। उसे 1000 स्वर्ण मुद्रायें ईनाम में दी जायेंगी।

अगले दिन अकबर का आदेश पूरे राज्य में प्रसारित करवा दिया गया। कुछ दिनों तक यह चुनौती स्वीकार करने वाला कोई सामने नहीं आया। कोई साहस नहीं कर पा रहा था, कि पूरी रात यमुना के ठंडे जल में कमर तक डूबकर खड़ा रह सके। 

अकबर के राज्य में एक गरीब धोबी भी रहता था। उनकी मां की तबीयत बहुत खराब थी। लेकिन पैसे के अभाव में वह उनका इलाज नहीं करा पा रहा था। जब उन्होंने यह संदेश सुना, तो उन्होंने पैसे के लिए यमुना में खड़े होने की चुनौती स्वीकार कर ली।

वह अकबर के सैनिकों की देखरेख में रात भर यमुना में खड़ा रहा, वो पूरी रात कमर तक पानी में डूबा रहा। सुबह होते ही सैनिक उसको साथ लेकर अकबर के सामने आ गए।

अकबर के लिए इस पर विश्वास करना मुश्किल था। उसने धोबी से पूछा, "तुम पूरी रात यमुना के पानी में कैसे खड़े रहे " क्या तुम्हे ठण्ड नहीं लगी। 

धोबी ने कहा जहाँपनाह ! मैं रात भर तुम्हारे महल में जलता हुआ दीया देखता रहा और इस तरह सारी रात बीत गई।

यह सुनकर अकबर ने हंसते हुए कहा, "अरे तो तुम पूरी रात महल के दीये से गर्मी लेते रहे। तुम बेईमानी से पूरी रात यमुना के पानी में खड़े रहे । तुम सजा के पात्र हो, इनाम के नहीं। सैनिकों, इसे बंदी बना लो।

बेचारे धोबी को जेल में डाल दिया गया। जब बीरबल को इस बात का पता चला तो उन्हें बहुत दुख हुआ। उस दिन बीरबल दरबार नहीं गए ।

बीरबल को दरबार से गायब पाकर अकबर ने एक सैनिक को उसके घर बुलाने के लिए भेजा। सिपाही ने वापस आकर अकबर से कहा कि बीरबल ने खाना नहीं खाया है। वह खिचड़ी बना हैं । खाना खाने के बाद ही बीरबल दरबार में आएंगे।

समय गुजरता गया। सुबह से दोपहर और दोपहर से शाम हो रही थी, लेकिन बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं हुए। अकबर सोचने लगे बीरबल ऐसा कभी नहीं करते थे। बीरबल की यह हरकत अकबर की समझ से परे थी।

शाम को वे स्वयं सिपाहियों के साथ बीरबल के घर पहुंचे। वहां पहुंचकर अकबर ने देखा कि बीरबल अपने घर के आंगन में चारपाई लेकर पड़ा हुआ है। पास के एक पेड़ के नीचे आग जल रही है और उसके ऊपर एक घड़ा लटका हुआ है।

यह नजारा देखकर अकबर न केवल हैरान हुआ, बल्कि गुस्सा भी हुआ। गुस्से में लाल और पीले होकर, अकबर ने बीरबल से पूछा, "बीरबल यह क्या है? तुम अभी तक दरबार में क्यों नहीं गए?"

बीरबल ने कहा जहाँपनाह मैंने खबर भेजी थी कि मैं खिचड़ी बना रहा हूं। खाने के बाद मैं दरबार में हाजिर होऊंगा। देखिए सामने पेड़ पर लटके घड़े में खिचड़ी पक रही है। पेड़ पर लटके घड़े की ओर इशारा करते हुए बीरबल ने उत्तर दिया।

अकबर ने गुस्से में आकर कहा - बीरबल तुम क्या पागल हो  गए हो। क्या इतनी दूर आग जल रही है। ऐसे खिचड़ी कैसे पक सकती है। 

बीरबल ने जबाब दिया - जब यमुना में खड़े धोबी को इतनी दूर स्थित महल में जलते दीये से गर्मी मिल सकती है। तो खिचड़ी क्यों नहीं बन सकती। यहाँ आग उस दीये से भी ज्यादा करीब है।

बीरबल की बात सुनकर अकबर का गुस्सा शांत हो गया। वे समझ गए कि बीरबल ने धोबी के साथ हुए अन्याय को समझने के लिए ऐसा किया है। उसे अपने किए पर पछतावा हुआ। सिपाहियों से कहकर उसने धोबी को कारागार से बाहर निकाला और इनाम के तौर पर उसे 1000 सोने के सिक्के दिए।

इस तरह बीरबल ने अपनी बुद्धि से एक गरीब धोबी के साथ अन्याय नहीं होने दिया।

अकबर बीरबल की कहानी "बीरबल की खिचड़ी" आपको कैसी लगी। आशा करते हैं, अच्छी लगी होगी। अगर अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों में भी जरूर शेयर करें। धन्यबाद। 


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